आज फिर एक उदासी मिली
काली स्याह रात के बाद तन्हाई मिली
यूं तो मैं जीना बहुत पीछे छोड़ आया था
मगर रह गुजर में फिर रुसवाई मिली
दर्द जाना पहचाना था
जर्जर रूह को फिर से एक आह मिली
काम करने का अब हौसला उतना नहीं
हर तरफ मातमी उदासी मिली
Monday, January 11, 2010
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