बीत गया साल,
दे गया हमको कुछ पल अविस्मर्णीय,
और कुछ अधूरे ख्वाब
हमने कुछ सीखा,
कुछ पीछे छोड़ दिया
कुछ छूट गया और कुछ जोड़ लिया
जब तुमने भी विदा लिया,
अश्रुपूरित नयनो से,
थके मन और थके कदमो में
हम स्थिर थे या फिर से भटके से,
मन में वेदना और भावनाओ का बवंडर था,
खतरनाक मंजर था
........................
हम दृष्टा भी थे, भुक्ता भी
बीत गया साल,
आशाएं हैं नव वर्ष कुछ नयी चुनौतियाँ लेकर आये,
कोई और न बिछड़ जाये ....
ईश्वर सबको सन्मति दे,
सन्मार्ग दे,
स्वस्थ रखे,
नव वर्ष मंगलमय,
सुधीर
Wednesday, December 29, 2010
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