बीत गया साल,
दे गया हमको कुछ पल अविस्मर्णीय,
और कुछ अधूरे ख्वाब
हमने कुछ सीखा,
कुछ पीछे छोड़ दिया
कुछ छूट गया और कुछ जोड़ लिया
जब तुमने भी विदा लिया,
अश्रुपूरित नयनो से,
थके मन और थके कदमो में
हम स्थिर थे या फिर से भटके से,
मन में वेदना और भावनाओ का बवंडर था,
खतरनाक मंजर था
........................
हम दृष्टा भी थे, भुक्ता भी
बीत गया साल,
आशाएं हैं नव वर्ष कुछ नयी चुनौतियाँ लेकर आये,
कोई और न बिछड़ जाये ....
ईश्वर सबको सन्मति दे,
सन्मार्ग दे,
स्वस्थ रखे,
नव वर्ष मंगलमय,
सुधीर
Wednesday, December 29, 2010
Wednesday, November 3, 2010
कश्मकश
आप कैसे होंगे !
मेरा क़त्ल करके खाक़ में मिलाने के बाद !
क्या आप आज भी खुल कर हँसते होंगे ?
झूठा दर्द किसको बयां करते होंगे ?
फिरसे किसी और की बलि चढ़ाते होंगे ?
दर्द मेरा, दर्द तेरा
मंज़र दर्द का, समंदर दर्द का
रिश्ते दर्द के, किरदार दर्द के
दुनिया दर्द की, आलम दर्द का
इस दर्द में कैसे जीते होंगे आप !
तुमपे मरने में जूनून था मुझे,
तुमसे मरना मेरा नसीब था !
शिकायतों का वक्त जाता रहा
मलालों का दौर ज़ारी है अभी
एक कश्मकश मामूली सिफर सी
खुश तो होंगे न आप ?
कैसे होंगे आप ?
मुझे ज़मींदोज़ करने के बाद!
क्षमा,
सुधीर
मेरा क़त्ल करके खाक़ में मिलाने के बाद !
क्या आप आज भी खुल कर हँसते होंगे ?
झूठा दर्द किसको बयां करते होंगे ?
फिरसे किसी और की बलि चढ़ाते होंगे ?
दर्द मेरा, दर्द तेरा
मंज़र दर्द का, समंदर दर्द का
रिश्ते दर्द के, किरदार दर्द के
दुनिया दर्द की, आलम दर्द का
इस दर्द में कैसे जीते होंगे आप !
तुमपे मरने में जूनून था मुझे,
तुमसे मरना मेरा नसीब था !
शिकायतों का वक्त जाता रहा
मलालों का दौर ज़ारी है अभी
एक कश्मकश मामूली सिफर सी
खुश तो होंगे न आप ?
कैसे होंगे आप ?
मुझे ज़मींदोज़ करने के बाद!
क्षमा,
सुधीर
Wednesday, August 4, 2010
Friday, February 19, 2010
भविष्यवक्ता और वशीकरण
एक अज़ीज़ के कहने पर,
मैं एक भविष्य वक्ता से मिला....
वो बोली क्या तकलीफ है?
मैंने कहा कोई तकलीफ नहीं, बस इसी बात की तकलीफ है।
एक मित्र के कुछ सवाल हैं बस वही पूछने आया हूँ, उसने जिद की है
वो बोली उस मित्र की समस्याओं का समाधान १ महीने में हो सकता है ...
उसे कठिन मेंहनत करनी होगी....
वो बोली तुम किसी मानसिक वेदना का शिकार लगते हो,
मेरे एक साप्ताहिक कार्यक्रम में पंजीकरण करवा लो....
जून के महीने में कुछ ऐसा होगा ... अक्तूबर में कुछ वैसा....
तुम्हें २ व्यक्तियों से सावधान रहना होगा
कोई फूल का गुलदस्ता दे तो सावधान रहना
उसमें कोई वशीकरण की पूर्ण संभावना है ...
मैंने कहा मुझे वशीकरण की ही तो ज़रुरत है॥
मुझ पर किसी का वशीकरण नहीं ...
मुझे तो इस लोक से वियोग है ...
.....
क्षमा,
सुधीर
मैं एक भविष्य वक्ता से मिला....
वो बोली क्या तकलीफ है?
मैंने कहा कोई तकलीफ नहीं, बस इसी बात की तकलीफ है।
एक मित्र के कुछ सवाल हैं बस वही पूछने आया हूँ, उसने जिद की है
वो बोली उस मित्र की समस्याओं का समाधान १ महीने में हो सकता है ...
उसे कठिन मेंहनत करनी होगी....
वो बोली तुम किसी मानसिक वेदना का शिकार लगते हो,
मेरे एक साप्ताहिक कार्यक्रम में पंजीकरण करवा लो....
जून के महीने में कुछ ऐसा होगा ... अक्तूबर में कुछ वैसा....
तुम्हें २ व्यक्तियों से सावधान रहना होगा
कोई फूल का गुलदस्ता दे तो सावधान रहना
उसमें कोई वशीकरण की पूर्ण संभावना है ...
मैंने कहा मुझे वशीकरण की ही तो ज़रुरत है॥
मुझ पर किसी का वशीकरण नहीं ...
मुझे तो इस लोक से वियोग है ...
.....
क्षमा,
सुधीर
Monday, January 11, 2010
उदासी
आज फिर एक उदासी मिली
काली स्याह रात के बाद तन्हाई मिली
यूं तो मैं जीना बहुत पीछे छोड़ आया था
मगर रह गुजर में फिर रुसवाई मिली
दर्द जाना पहचाना था
जर्जर रूह को फिर से एक आह मिली
काम करने का अब हौसला उतना नहीं
हर तरफ मातमी उदासी मिली
काली स्याह रात के बाद तन्हाई मिली
यूं तो मैं जीना बहुत पीछे छोड़ आया था
मगर रह गुजर में फिर रुसवाई मिली
दर्द जाना पहचाना था
जर्जर रूह को फिर से एक आह मिली
काम करने का अब हौसला उतना नहीं
हर तरफ मातमी उदासी मिली
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