Wednesday, November 3, 2010

कश्मकश

आप कैसे होंगे !

मेरा क़त्ल करके खाक़  में मिलाने के बाद !

क्या आप आज भी खुल कर  हँसते होंगे ?
 झूठा दर्द किसको बयां करते होंगे ?
फिरसे किसी और की बलि चढ़ाते होंगे ?

दर्द मेरा, दर्द तेरा
मंज़र दर्द का, समंदर दर्द का
रिश्ते दर्द के, किरदार  दर्द के
दुनिया दर्द की, आलम दर्द का
इस दर्द में कैसे जीते होंगे आप !

तुमपे मरने में जूनून था मुझे,
तुमसे मरना मेरा नसीब था !
शिकायतों का वक्त जाता रहा
मलालों का दौर ज़ारी है अभी

एक कश्मकश मामूली सिफर सी
खुश तो होंगे न आप ?

कैसे होंगे आप ?
मुझे ज़मींदोज़ करने के बाद!

क्षमा,
सुधीर


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